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मार्गmārga · मार्ग, रास्ता
योग के मार्ग
18 अक्टूबर 2026 को अद्यतन · स्रोत 18 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए

संक्षेप में
योग कोई एक विधि नहीं, कई मार्ग हैं। ग्रंथ हठ योग (शरीर और श्वास), राज योग (पतंजलि के अनुसार मन का योग), भगवद्गीता के कर्म, भक्ति और ज्ञान योग, और तंत्र, मंत्र तथा नाद योग का वर्णन करते हैं। अष्टांग विन्यास, अयंगर, शिवानंद जैसी आधुनिक शैलियाँ अधिकतर हठ योग से निकली हैं।
हठयोग प्रदीपिका आदिनाथ को प्रणाम करके शुरू होती है, जिन्होंने हठ योग को राज योग के ऊँचे शिखर तक ले जाने वाली सीढ़ी के रूप में सिखाया। दूसरे अध्याय के अंत के पास यह ग्रंथ साफ नियम देता है: हठ योग के बिना राज योग सिद्ध नहीं होता, और राज योग के बिना हठ योग नहीं (पंचम सिंह के संस्करण में 2.76)। ये मार्ग एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं, एक ही घर के अलग-अलग दरवाजे हैं। पहले पढ़ें योग क्या है, फिर नीचे की तालिकाओं से अपना दरवाजा चुनें।
पारंपरिक मार्ग: कौन सा योग चुनें
| मार्ग | ग्रंथ, उद्गम या प्रवर्तक | आप क्या करते हैं | किसके लिए | स्तर | शारीरिक मेहनत |
|---|---|---|---|---|---|
| हठ योग | हठप्रदीपिका, 15वीं सदी; नाथ परंपरा | आसन, प्राणायाम, मुद्रा, विश्राम | जो शरीर से शुरू करना चाहते हैं | सभी स्तर | मध्यम |
| राज योग | पतंजलि के योगसूत्र; नाम विवेकानंद ने लोकप्रिय किया (1896) | नैतिकता, बैठकर ध्यान, एकाग्रता | चिंतनशील लोग, ध्यान करने वाले | सभी स्तर | बहुत कम |
| अष्टांग योग | योगसूत्र 2.29 | यम, नियम, आसन, प्राणायाम… समाधि | जो पूरा नक्शा समझना चाहते हैं | सभी स्तर | कम |
| कर्म योग | भगवद्गीता, अध्याय 2-3 | आसक्ति के बिना कर्म, सेवा | सक्रिय लोग, सेवा करने वाले, कामकाजी | सभी स्तर | जरूरी नहीं |
| भक्ति योग | गीता अध्याय 12, नारद भक्ति सूत्र, भागवत | कीर्तन, प्रार्थना, जप, पूजा | भक्ति-भाव वाले, संगीत-प्रेमी | सभी स्तर | जरूरी नहीं |
| ज्ञान योग | उपनिषद, गीता, शंकराचार्य | स्वाध्याय, मनन, आत्म-विचार | प्रश्न करने वाला मन | मध्यम | जरूरी नहीं |
| क्रिया योग | योगसूत्र 2.1; लाहिड़ी महाशय और योगानंद की परंपरा | तप, स्वाध्याय, ईश्वर-प्रणिधान; दीक्षा से मिली ध्यान-विधि | समर्पित साधक | शुरुआती (पतंजलि) से दीक्षित तक | कम |
| कुंडलिनी योग | हठ और तंत्र ग्रंथ; योगी भजन की आधुनिक पद्धति (1968 से) | गतिशील क्रियाएँ, तेज श्वास, मंत्र, ध्यान | जिन्हें तीव्रता और लय पसंद है | सावधानी के साथ शुरुआती | मध्यम से तेज |
| योग निद्रा | स्वामी सत्यानंद, मुंगेर; पुस्तक योग निद्रा (1976) | लेटकर निर्देशित विश्राम | सभी, कम चल-फिर पाने वाले भी | सभी स्तर | नहीं |
आधुनिक शैलियाँ, संक्षेप में
बीसवीं सदी में हठ योग से कई शैलियाँ निकलीं, जिनमें से बहुत सी भारत में ही जन्मीं:
- अष्टांग विन्यास: के. पट्टाभि जोइस (1915-2009), मैसूर; श्वास से जुड़े आसनों की तय शृंखला। तेज और अनुशासित।
- अयंगर योग: बी. के. एस. अयंगर (1918-2014), पुणे; सटीक संरेखण, देर तक टिकना, सहायक साधन (प्रॉप्स)। शुरुआती और शारीरिक सीमाओं वाले लोगों के लिए उपयुक्त।
- शिवानंद योग: स्वामी शिवानंद (1887-1963), ऋषिकेश, और स्वामी विष्णुदेवानंद; बारह मूल आसन, प्राणायाम, विश्राम, कीर्तन।
- बिहार स्कूल: स्वामी सत्यानंद (1923-2009), मुंगेर, 1963; हठ योग, प्राणायाम, योग निद्रा, क्रियाएँ और ध्यान की व्यवस्थित पद्धति।
- विनियोग: टी. के. वी. देसिकाचार, कृष्णमाचार्य के पुत्र, चेन्नई; व्यक्ति के अनुसार ढाला गया, श्वास-प्रधान अभ्यास (नाम योगसूत्र 3.6 से)।
- विन्यास, पावर योग, हॉट योग, यिन योग: अधिकतर विदेशों में विकसित शैलियाँ, जो कृष्णमाचार्य और अष्टांग की परंपरा या ताओवादी विचारों से प्रेरित हैं।
जानने योग्य
तय नहीं कर पा रहे? कौन सा योग आपके लिए है, यह प्रश्नोत्तरी आजमाएँ। याद रखें, आप एक शारीरिक शैली को हृदय या मन के किसी मार्ग के साथ जोड़ सकते हैं।
आप क्या खोज रहे हैं, उसके अनुसार चुनें
- शरीर से धीरे-धीरे शुरुआत: हठ योग, फिर शुरुआती आसन।
- मन को शांत करना: राज योग, योग निद्रा, ध्यान कैसे करें।
- हृदय के लिए: भक्ति योग, मंत्र जप।
- प्रश्नों के लिए: ज्ञान योग, अष्टांग योग, योगसूत्र।
- रोजमर्रा के जीवन के लिए: कर्म योग, यम और नियम।
- ऊर्जा और तीव्रता के लिए: कुंडलिनी योग, सावधानी के साथ।
इस अध्याय में
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
योग के कितने प्रकार हैं?
कोई तय संख्या नहीं है। भगवद्गीता कर्म, ज्ञान और भक्ति योग की बात करती है; बाद के आचार्य राज योग और हठ योग जोड़ते हैं; तंत्र, मंत्र, नाद और क्रिया योग भी पारंपरिक मार्ग हैं, और आधुनिक शैलियाँ दर्जनों हैं।
शुरुआत करने वालों के लिए कौन सा योग ठीक है?
शरीर से शुरू करना हो तो सौम्य हठ योग, शिवानंद या अयंगर शैली अच्छी शुरुआत है; आराम की जरूरत हो तो योग निद्रा; कर्म योग और भक्ति योग के लिए किसी शारीरिक क्षमता की जरूरत ही नहीं।
क्या एक साथ कई मार्गों पर चल सकते हैं?
हाँ, और ग्रंथ यही मानते हैं। हठयोग प्रदीपिका कहती है कि हठ और राज योग एक-दूसरे के बिना पूरे नहीं होते (2.76), और गीता कर्म, भक्ति, ज्ञान और ध्यान को साथ बुनती है।
स्रोत
- The Hatha Yoga Pradipika, translated by Pancham Sinh (Allahabad, Panini Office, 1915; बाद का पुनर्मुद्रण), Internet Archive 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया
- पतंजलि, योगसूत्र, संस्कृत पाठ (GRETIL, गॉटिंगेन विश्वविद्यालय) 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया
- भगवद्गीता, आलोचनात्मक संस्करण (भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट), संस्कृत पाठ (GRETIL) 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया