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भाषा : हिन्दी

IV

प्राणायामprāṇāyāma · प्राण का विस्तार

श्वास, प्राणायाम और बंध

18 अक्टूबर 2026 को अद्यतन · स्रोत 18 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए

हिमालय की तलहटी से निकलकर ऋषिकेश में बहती गंगा
फोटो: RKDas09, Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

संक्षेप में

प्राणायाम श्वास का नियमन है। हठयोग प्रदीपिका इसे आसन के बाद सिखाती है: स्थिर बैठें, नाक से धीरे साँस लें, कभी जोर न लगाएँ और क्रम से आगे बढ़ें। अनुलोम विलोम जैसी सरल विधि से, बिना कुम्भक के, शुरुआत करें; कुम्भक और कपालभाति जैसी तेज विधियाँ किसी शिक्षक से सीखें।

हठयोग प्रदीपिका का दूसरा अध्याय श्वास को समर्पित है, और वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने पर जोर देता है: वायु को «धीरे-धीरे, बलपूर्वक नहीं» छोड़ना है (पंचम सिंह के अनुवाद में 2.9)। तीसरा अध्याय मुद्राओं और बंधों पर है, वे मुहरें और ताले जो श्वास को थामते हैं। श्वास की विधियाँ शक्तिशाली हैं, और इसीलिए यहाँ हर पृष्ठ अपनी सावधानियों से शुरू होता है।

ग्रंथों का क्रम

हठ ग्रंथ अभ्यास को परतों में बनाते हैं, और यह अध्याय उसी क्रम पर चलता है:

  1. पहले आसन। हठयोग प्रदीपिका (2.1) कहती है, «आसन सिद्ध हो जाने पर» योगी गुरु के बताए अनुसार प्राणायाम करे। पतंजलि भी यही कहते हैं (योगसूत्र 2.49)।
  2. जरूरत हो तो शुद्धि। छह शुद्धि-क्रियाएँ (षट्कर्म) उन्हीं के लिए हैं जिन्हें उनकी जरूरत है (हठयोग प्रदीपिका 2.21)।
  3. श्वास। प्राणायाम, अनुलोम विलोम (नाड़ी शोधन) से लेकर आठ कुम्भकों तक, जिनका परिचय प्राणायाम के प्रकार में है।
  4. मुहरें और ताले। बंध और प्रमुख मुद्राएँ, जो श्वास और ध्यान को थामती हैं।
  5. ध्यान की ओर। त्राटक, भीतर की ओर दृष्टि और भ्रामरी का गुंजन ध्यान के अध्याय तक ले जाते हैं।

स्तर के अनुसार

स्तरश्वासमुद्रा और बंधकहाँ से शुरू करें
शुरुआतीसाँस को देखना, लंबा रेचक, बिना कुम्भक के अनुलोम विलोम और उज्जायी, भ्रामरीअंजलि, ज्ञान मुद्रा और ध्यान मुद्रा, जीभ तालु से लगानाप्राणायाम कैसे करें
मध्यमछोटे कुम्भक (1:1:2), कपालभाति के छोटे चक्र, शीतली जैसी शीतल विधियाँतीनों बंध एक-एक करके, षण्मुखी मुद्रा, थोड़ी देर शाम्भवी; जल नेति, त्राटकप्राणायाम के प्रकार
उन्नतलंबे अनुपात (1:2:2 से 1:4:2 की ओर), कुम्भक के साथ भस्त्रिकामहाबंध, महामुद्रा, कुम्भक के साथ विपरीत करणीकिसी शिक्षक के साथ, महीनों के अभ्यास के बाद

आसनों में आपका स्तर जो भी हो, प्राणायाम शुरुआती की तरह ही शुरू करें।

शास्त्रीय और आधुनिक

आज «योगिक श्वास» कही जाने वाली हर चीज ग्रंथों से नहीं आती। नाड़ी शोधन, उज्जायी, भ्रामरी, कपालभाति और भस्त्रिका ग्रंथों में हैं; बॉक्स ब्रीदिंग, 4-7-8 और रेजोनेंट ब्रीदिंग आधुनिक विधियाँ हैं, जो उन्हीं सिद्धांतों पर बनी हैं। हर पृष्ठ बताता है कि कौन सी विधि किस श्रेणी की है, और श्वास टाइमर दोनों की लय रखने में मदद करता है।

इस अध्याय में

प्राणायामप्राणायाम, ग्रंथों से अभ्यास तक योगिक श्वासprāṇāyāma · श्वास का विस्तार और नियंत्रणयोग का चौथा अंग, योगसूत्र और हठयोग प्रदीपिका के आधार पर, सुरक्षित शुरुआत के तरीके के साथ।नाडीशोधनअनुलोम विलोम, नाड़ी शोधन प्राणायामnāḍī-śodhana · नाड़ियों की शुद्धिएक-एक नासिका से श्वास, शुरुआती लय, चार चरण और वे श्लोक जिनसे यह विधि आती है।बन्धबंध, योग के तीन तालेbandha · ताला, बंधनग्रंथों से मूल, उड्डीयान और जालंधर बंध: इन्हें एक-एक करके कैसे सीखें, कैसे जोड़ें, और किन्हें ये नहीं करने चाहिए।मुद्रामुद्राएँ, योग की मुहरेंmudrā · मुहर, चिह्नहस्त मुद्राएँ और हठ योग की बड़ी मुद्राएँ: ग्रंथ क्या गिनाते हैं, हर मुद्रा का अर्थ, और उन्हें सुरक्षित ढंग से कैसे करें।त्राटकत्राटक, स्थिर दृष्टिtrāṭaka · स्थिर दृष्टिहठ ग्रंथों में बताया गया लौ पर त्राटक: आँखों की शुद्धि और ध्यान का प्रशिक्षण, कदम-दर-कदम, सावधानियों के साथ।कुम्भकप्राणायाम के प्रकार, ग्रंथों के अनुसारkumbhaka · घड़े की तरह रोकनाहठयोग प्रदीपिका के आठ कुम्भक, घेरंड संहिता के अलग आठ, पतंजलि के चार, और अपना अभ्यास चुनने का सरल तरीका।उज्जायीउज्जायी, विजयी श्वासujjāyī · विजयी (श्वास)योग कक्षाओं में सुनाई देने वाला फुसफुसाता श्वास, तीन कदमों में, फिर हठ ग्रंथों में बताया गया कुम्भक वाला पुराना रूप।भ्रामरीभ्रामरी, भौंरे के गुंजन वाला श्वासbhrāmarī · भ्रमर (भौंरे) का श्वासशास्त्रीय श्वासों में सबसे सौम्य, एक-एक कदम, षण्मुखी मुद्रा, संस्कृत श्लोक के दो भौंरे और अध्ययन क्या दिखाते हैं, क्या नहीं।शीतलीशीतली और शीतकारी, ठंडक देने वाला श्वासśītalī · ठंडक देने वाली; sītkārī · सीत्कार करने वालीमुँह से ली जाने वाली केवल दो शास्त्रीय श्वास-विधियाँ: हर एक कैसे करें, ग्रंथ क्या कहते हैं, और शरीर के तापमान पर अध्ययन में वास्तव में क्या मिला।कपालभातिकपालभाति, मस्तक को उज्ज्वल करने वाला श्वासkapāla-bhāti · मस्तक की चमकनाक से छोटे, सक्रिय रेचक, छोटे चक्रों में सीखे गए: पहले सावधानियाँ, फिर विधि, ग्रंथ और शोध।भस्त्रिकाभस्त्रिका, धौंकनी जैसा श्वासbhastrikā · धौंकनीशास्त्रीय श्वासों में सबसे जोरदार, दोनों चरण सक्रिय: पहले सावधानियाँ, फिर कपालभाति से अंतर, तीन चरण और श्लोक।ज्ञानमुद्राज्ञान मुद्रा और चिन मुद्रा, ज्ञान की मुहरjñāna-mudrā · ज्ञान की मुहर; cin-mudrā · चेतना की मुहरध्यान की सबसे परिचित मुद्रा: इसे कैसे बनाएँ, अँगूठे और तर्जनी के घेरे का अर्थ, यह वास्तव में कहाँ से आई और किन दावों को अनदेखा करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुरुआती लोग प्राणायाम कहाँ से शुरू करें?

साँस को देखने से, लंबी साँस छोड़ने से और बिना कुम्भक के अनुलोम विलोम से, रोज पाँच से दस मिनट। प्राणायाम कैसे करें वाला पृष्ठ पूरा क्रम देता है।

प्राणायाम, मुद्रा और बंध में क्या अंतर है?

प्राणायाम श्वास का नियमन है; मुद्राएँ हाथों या पूरे शरीर की मुहरें हैं; बंध गले, पेट और मूलाधार के तीन ताले हैं जो कुम्भक में लगाए जाते हैं। हठ ग्रंथ इन्हें आसन के बाद इसी क्रम में सिखाते हैं।

बॉक्स ब्रीदिंग और 4-7-8 क्या योग का हिस्सा हैं?

ये आधुनिक विधियाँ हैं, शास्त्रीय ग्रंथों में नहीं मिलतीं, पर प्राणायाम के ही सिद्धांतों पर बनी हैं: गिनती, धीमी साँस और रोकना।

धीरे-धीरे और अपनी सीमा के भीतर अभ्यास करें। योग किसी योग्य शिक्षक से सीखना सबसे अच्छा है; यह पृष्ठ उनकी जगह नहीं लेता।

स्रोत

  1. The Hatha Yoga Pradipika, translated by Pancham Sinh, Sacred Books of the Hindus vol. XV part 3 (1915), Internet Archive 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया
  2. स्वात्माराम, हठयोगप्रदीपिका, संस्कृत पाठ (GRETIL, गॉटिंगेन विश्वविद्यालय) 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया
  3. Yoga: What You Need To Know — National Center for Complementary and Integrative Health (NIH) 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया