त्राटकtrāṭaka · स्थिर दृष्टि
त्राटक, स्थिर दृष्टि
3 मिनट में पढ़ें · 18 अक्टूबर 2026 को अद्यतन · स्रोत 18 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए
संक्षेप में
त्राटक किसी छोटी वस्तु, प्रायः दीपक या मोमबत्ती की लौ, को बिना पलक झपकाए स्थिर दृष्टि से देखने का अभ्यास है, जिसके बाद आँखें बंद करके उसकी छवि को मन में थामा जाता है। हठयोग प्रदीपिका इसे छह शुद्धि-क्रियाओं में गिनती है (2.31-2.32)। हाथ भर की दूरी पर एक मिनट से शुरू करें, कभी जोर न लगाएँ, और धीरे-धीरे पाँच या दस मिनट तक जाएँ।
ग्रंथ क्या कहते हैं
त्राटक हठयोग प्रदीपिका की छह शुद्धि-क्रियाओं (षट्कर्म) में चौथी है, वह जो आँखों के माध्यम से शुद्ध करती है।
निरीक्षेन्निश्चलदृशा सूक्ष्मलक्ष्यं समाहितः । अश्रुसम्पातपर्यन्तमाचार्यैस्त्राटकं स्मृतम् ॥
nirīkṣen niścala-dṛśā sūkṣma-lakṣyaṃ samāhitaḥ | aśru-sampāta-paryantam ācāryais trāṭakaṃ smṛtam ||
एकाग्रचित्त होकर, आँसू गिरने तक किसी छोटे लक्ष्य को निश्चल दृष्टि से देखें: आचार्य इसे त्राटक कहते हैं।
अगला श्लोक कहता है कि यह आँखों के रोगों से मुक्त करता है और आलस्य दूर करता है, और इसे «गहनों की पेटी की तरह बड़े यत्न से गुप्त रखना चाहिए» (2.32, पंचम सिंह, 1915, हमारा अनुवाद)। घेरंड संहिता भी यही विधि देती है, «किसी छोटी वस्तु को बिना पलक झपकाए, जब तक आँसू न बहने लगें» (1.53, वसु, हमारा अनुवाद), और इसे शाम्भवी, भीतर की दृष्टि, से जोड़ती है (1.54)। ये परंपरा के वचन हैं; किसी अध्ययन ने इनकी जाँच नहीं की है।
ग्रंथ लौ का उल्लेख नहीं करते। आधुनिक शिक्षण में लौ सबसे आम लक्ष्य इसलिए बनी कि आँखें बंद करने पर वह साफ छवि छोड़ती है।
विधि
- तैयारी। अँधेरा, बिना हवा के झोंकों वाला कमरा। दीपक या मोमबत्ती को हाथ भर की दूरी पर रखें, लौ आँखों की ऊँचाई पर, ताकि आप सीधे सामने देखें, न ऊपर, न नीचे।
- बैठें सीधे, गद्दी या कुर्सी पर। कुछ साँसों तक आँखें बंद रखें और चेहरा ढीला करें।
- देखें। आँखें खोलें और लौ को देखें, अच्छा हो तो बाती या लौ की नोक को, बिना पलक झपकाए, जब तक सहज लगे। आँखें कोमल रखें, फाड़कर नहीं।
- बंद करें। जब आँखों में पानी आए या पलक झपकाने की जरूरत हो, आँखें बंद कर लें। उसकी छवि को भौंहों के बीच के स्थान में, बिना जोर लगाए, तब तक थामे रहें जब तक वह मिट न जाए।
- दोहराएँ दो या तीन बार।
- समाप्त करें हथेलियों को आपस में रगड़कर और कुछ साँसों तक बंद आँखों पर रखकर।
शुरुआती लय और प्रगति
| चरण | देखना | आँखें बंद | चक्र |
|---|---|---|---|
| सप्ताह 1 | 30 सेकंड से 1 मिनट | उतना ही समय | 2 |
| सप्ताह 2-4 | 1 से 2 मिनट | उतना ही समय | 2 से 3 |
| एक महीने के बाद | 3 मिनट तक | उतना ही समय | 3 (कुल लगभग 10 मिनट) |
शाम को या ध्यान से पहले अभ्यास करें, खाली पेट या भोजन के दो घंटे बाद। आँसू आँखें बंद करने का संकेत हैं, हर कीमत पर पहुँचने का लक्ष्य नहीं।
ध्यान का अभ्यास
त्राटक एक चौराहे पर खड़ा है। क्रिया के रूप में यह शरीर की शुद्धि का हिस्सा है; एक बिंदु पर स्थिर दृष्टि के रूप में यह सीधे एकाग्रता का प्रशिक्षण है, जिसे पतंजलि धारणा कहते हैं, «मन को एक स्थान पर बाँधना» (योगसूत्र 3.1)। जब बाहर की लौ की जगह उसकी भीतरी छवि ले लेती है, तो अभ्यास ध्यान में बदल जाता है। ध्यान कैसे करें बैठने की बुनियादी विधि देता है।
विकल्प: अंतर त्राटक, आँखें बंद करके किसी कल्पित बिंदु या छवि पर भीतरी दृष्टि; किसी बिंदु, ॐ अक्षर या चंद्रमा पर दृष्टि। ये उन लोगों के लिए ठीक हैं जिन्हें लौ से बचना चाहिए।
आम गलतियाँ
- आँखों को जबरदस्ती खुला रखना, जब तक जलन न होने लगे।
- लौ बहुत पास या आँखों के स्तर से नीचे, जिससे गर्दन और आँखों पर जोर पड़ता है।
- हवा का झोंका, जिससे लौ नाचने लगती है।
- पहले ही दिन से लंबे सत्र। थोड़ा और नियमित, यही नियम है।
आगे
त्राटक दृष्टि की दूसरी मुद्राओं, जैसे शाम्भवी, के साथ अच्छी तरह जुड़ता है। एकाग्रता और ध्यान की ओर निर्देशित मार्ग के लिए ध्यान का अध्याय और प्राणायाम का अध्याय देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
त्राटक कितनी देर करना चाहिए?
शुरू में एक से दो मिनट देखना, फिर उतनी ही देर आँखें बंद। हफ्तों में कुल पाँच से दस मिनट। ग्रंथ कहते हैं आँसू आने तक; उन्हें जबरदस्ती लाने की जरूरत नहीं।
क्या त्राटक आँखों के लिए सुरक्षित है?
सौम्य त्राटक आम तौर पर अच्छी तरह सहन होता है। आँखों के रोग में, आँख की सर्जरी के बाद, बहुत सूखी आँखों में या कॉन्टैक्ट लेंस पहने हुए इससे बचें, और आँखों में जलन या दर्द हो तो तुरंत रुक जाएँ।
क्या मोमबत्ती के अलावा किसी और चीज पर त्राटक कर सकते हैं?
हाँ। ग्रंथ एक छोटे लक्ष्य की बात करते हैं। सफेद दीवार पर काला बिंदु, ॐ का चिह्न, कोई छोटी छवि या उगता चंद्रमा पारंपरिक विकल्प हैं, और इनमें लौ की झिलमिलाहट नहीं होती।
क्या त्राटक से याददाश्त या एकाग्रता बढ़ती है?
परंपरा इसे ध्यान का प्रशिक्षण, धारणा तक पहुँचने का पुल, मानती है। अच्छी गुणवत्ता के अध्ययन नहीं हैं, इसलिए हम कोई मापा हुआ दावा नहीं करते।
धीरे-धीरे और अपनी सीमा के भीतर अभ्यास करें। योग किसी योग्य शिक्षक से सीखना सबसे अच्छा है; यह पृष्ठ उनकी जगह नहीं लेता।
स्रोत
- The Hatha Yoga Pradipika, translated by Pancham Sinh, Sacred Books of the Hindus vol. XV part 3 (1915), Internet Archive 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया
- स्वात्माराम, हठयोगप्रदीपिका, संस्कृत पाठ (GRETIL, गॉटिंगेन विश्वविद्यालय) 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया
- Srisa Chandra Vasu (tr.), The Gheranda Samhita, Sacred Books of the Hindus vol. XV (1914-1915), Internet Archive 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया