मार्गmārga · मार्ग, पथ
आपका योग-मार्ग कौन-सा है?
18 अक्टूबर 2026 को अद्यतन · स्रोत 18 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए
संक्षेप में
परंपरा योग के कई मार्ग बताती है: हठ (शरीर और श्वास), कर्म (निःस्वार्थ कर्म), भक्ति (प्रेम और समर्पण), और भीतर के मार्ग, राजयोग (पतंजलि के अनुसार ध्यान) तथा ज्ञानयोग (उपनिषदों के अनुसार आत्म-ज्ञान)। छह प्रश्नों के उत्तर देकर देखें कि पहले कौन-सा द्वार आपके लिए है; भगवद्गीता की तरह ज्यादातर लोग अंत में इन्हें मिलाते हैं।
प्रश्नोत्तरी कैसे काम करती है
छह प्रश्नों में से हर एक के चार उत्तर हमेशा एक ही क्रम में हैं: शरीर और श्वास, कर्म, भक्ति, मन। आपके उत्तर 18 में से एक अंक बनाते हैं, जो आपको शरीर से मन तक की इस रेखा पर कहीं रखता है। अगर आपने बहुत अलग-अलग उत्तर चुने हैं, तो अपने परिणाम के पास वाले परिणाम भी पढ़ें: मार्ग बंद खाने नहीं हैं।
मार्ग, कुछ पंक्तियों में
| मार्ग | संस्कृत | क्या करते हैं | कहाँ से आता है |
|---|---|---|---|
| हठयोग | हठयोग haṭha-yoga | आसन, प्राणायाम, मुद्रा, विश्राम | हठयोग प्रदीपिका और नाथ परंपरा |
| कर्मयोग | कर्मयोग karma-yoga | अर्पित कर्म, फल की आसक्ति के बिना | भगवद्गीता, अध्याय 2 और 3 |
| भक्तियोग | भक्तियोग bhakti-yoga | कीर्तन, मंत्र, प्रार्थना, पूजा | भगवद्गीता, अध्याय 12; भक्ति के संत |
| राजयोग | राजयोग rāja-yoga | यम-नियम, बैठने का आसन, एकाग्रता, ध्यान | पतंजलि के योगसूत्र |
| ज्ञानयोग | ज्ञानयोग jñāna-yoga | स्वाध्याय, आत्म-विचार | उपनिषद; भगवद्गीता |
ये मार्ग कभी एक-दूसरे के विरोधी नहीं माने गए। हठयोग प्रदीपिका की शुरुआत ही हठयोग को राजयोग के शिखर तक जाने वाली सीढ़ी बताकर होती है, और भगवद्गीता (3.3) में श्रीकृष्ण प्राचीन काल से सिखाए गए दो मार्गों — ज्ञानयोग और कर्मयोग — की बात करते हैं, फिर उसी उपदेश में भक्ति और ध्यान को भी बुन देते हैं।
लोकेऽस्मिन्द्विविधा निष्ठा पुरा प्रोक्ता मयानघ । ज्ञानयोगेन सांख्यानां कर्मयोगेन योगिनाम् ॥
loke 'smin dvividhā niṣṭhā purā proktā mayānagha | jñāna-yogena sāṃkhyānāṃ karma-yogena yoginām ||
हे निष्पाप, इस संसार में मैंने पहले दो प्रकार की निष्ठा बताई थी: सांख्य वालों के लिए ज्ञानयोग से, और योगियों के लिए कर्मयोग से।
आधुनिक शैलियों (विन्यास, अष्टांग, यिन, अयंगर) सहित पूरी तुलना योग के प्रकार वाले पृष्ठ पर है, और पतंजलि का नक्शा अष्टांग योग में।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
योग कितने प्रकार के होते हैं?
कोई तय संख्या नहीं है। भगवद्गीता कर्म, ज्ञान और भक्ति के योग की बात करती है; पतंजलि के मन के योग को आज राजयोग कहा जाता है; हठ, मंत्र, क्रिया और कुंडलिनी योग दूसरे पारंपरिक मार्ग हैं, और हठयोग से निकली दर्जनों आधुनिक शैलियाँ भी हैं।
योग के 4 प्रकार कौन-से हैं?
चार की प्रचलित सूची है: कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग और राजयोग। इसे 1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद की पुस्तकों ने लोकप्रिय बनाया; अक्सर हठयोग को भी जोड़ा जाता है, शरीर के मार्ग के रूप में जो बाकी की तैयारी करता है।
फिट रहने के लिए कौन-सा योग करना चाहिए?
शरीर से शुरू करना हो तो हठयोग का कोमल दैनिक सत्र पारंपरिक द्वार है: सूर्य नमस्कार, कुछ आसन, प्राणायाम और शवासन। अगर आप आसन नहीं कर सकते या नहीं करना चाहते, तो कर्मयोग और भक्तियोग किसी शारीरिक क्षमता की माँग नहीं करते।
क्या ध्यान भी योग का एक प्रकार है?
ध्यान पतंजलि के आठ अंगों में सातवाँ अंग है, इसलिए वह अलग प्रकार कम और योग का हिस्सा अधिक है। राजयोग वह मार्ग है जो ध्यान को केंद्र में रखता है।
स्रोत
- Bhagavadgītā, critical edition (Bhandarkar Oriental Research Institute), Sanskrit text (GRETIL) 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया
- Patañjali, Yogasūtra, Sanskrit text (GRETIL, University of Göttingen) 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया
- The Hatha Yoga Pradipika, translated by Pancham Sinh (Allahabad, Panini Office, 1915; बाद का पुनर्मुद्रण), Internet Archive 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया