वज्रासन, घुटनों के बल बैठने का आसन
3 मिनट में पढ़ें · 18 अक्टूबर 2026 को अद्यतन · स्रोत 18 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए
- संस्कृत
- वज्रासनVajrāsana
- नाम का अर्थ
- वज्र का आसन: वज्र, इंद्र का अस्त्र, जिसका अर्थ हीरा भी है, और आसन, बैठने की मुद्रा
- स्तर
- आरंभिक
- वर्ग
- बैठकर किए जाने वाले आसन
- ग्रंथों में
- घेरंड संहिता 2.12 (वसु, 1914-1915)
संक्षेप में
वज्रासन घुटनों के बल बैठने का आसन है: घुटने साथ, पैरों के पंजे जमीन पर, दोनों अंगूठे एक-दूसरे को छूते हुए, नितंब एड़ियों पर या उनके बीच, और रीढ़ सीधी। भारत में परंपरा से भोजन के बाद कुछ मिनट इसमें बैठा जाता है। घेरंड संहिता (2.12) इसे अपने बत्तीस आसनों में गिनाती है।
भारत में दोपहर के भोजन के बाद किसी मंदिर के आँगन या घर में झाँकिए, तो लोग एड़ियों पर बैठे दिखेंगे, पीठ सीधी, हाथ जाँघों पर। वज्रासन सबसे सरल शास्त्रीय आसनों में से है, और उन गिने-चुने आसनों में से जिनमें कूल्हों के लचीलेपन की जरूरत बिल्कुल नहीं होती। इसीलिए यह शुरुआत करने वालों के लिए, पालथी न मार पाने वालों के लिए, और जिनके घुटने घुटनों के बल बैठना सह लेते हैं, उनके ध्यान के लिए उपयुक्त है।
विधि
- चटाई पर घुटनों के बल बैठें, घुटने साथ, पैरों के पंजों का ऊपरी भाग जमीन पर सपाट।
- एड़ियों को थोड़ा अलग करें और दोनों अंगूठों को एक-दूसरे से छूने दें, ताकि पैर एक छोटा पालना बना लें।
- धीरे-धीरे पीछे बैठें, जब तक नितंब एड़ियों के बीच या उन पर न टिक जाएँ।
- हथेलियाँ नीचे करके हाथ जाँघों पर रखें। रीढ़ को कमर से सिर के शिखर तक लंबा करें।
- कंधे ढीले, ठुड्डी सीधी, आँखें बंद या दृष्टि नीचे।
- नाक से स्वाभाविक साँस लें। एक से पाँच मिनट रुकें।
- बाहर आने के लिए हाथों पर आगे झुकें, कूल्हे उठाएँ और एक-एक करके पैर पीछे फैलाएँ, या एक तरफ बैठ जाएँ।
आयुष मंत्रालय का कॉमन योग प्रोटोकॉल (2019) दंडासन से शुरू करता है: पैर सामने फैलाकर बैठें, फिर दायाँ पैर मोड़कर दाएँ नितंब के नीचे, फिर बायाँ पैर बाएँ नितंब के नीचे; अंगूठे एक-दूसरे को छुएँ, नितंब एड़ियों के बीच, हाथ घुटनों पर।
संरेखण
- पिंडलियाँ और पैरों के ऊपरी भाग सीधे पीछे की ओर; टखने बाहर की ओर न लुढ़कें।
- वजन दोनों बैठने वाली हड्डियों पर बराबर, श्रोणि (पेल्विस) सीधी, पीछे झुकी नहीं।
- घुटने साथ या एक मुट्ठी की दूरी पर, कभी जबरदस्ती चौड़े नहीं।
विकल्प
- सौम्य रूप: घुटनों और पिंडलियों के नीचे मुड़ा हुआ कंबल, और एड़ियों के बीच बैठने के लिए गद्दी या योग ब्लॉक। इससे घुटनों और टखनों का अधिकांश दबाव हट जाता है।
- टखनों के नीचे लपेटा तौलिया, अगर टखनों का अगला भाग दुखे।
- सुप्त वज्रासन: पीछे झुककर कोहनियों पर टिकने वाला मध्यम स्तर का आसन। इसे किसी शिक्षक के साथ सीखें; इसमें घुटनों और कमर पर जोर पड़ता है।
- ध्यान की बेंच पर: घुटनों के बल बैठने की नीची बेंच वही मुद्रा देती है, पैरों पर लगभग बिना वजन के।
सावधानियाँ
- घुटने की चोट, मेनिस्कस या लिगामेंट की समस्या, हाल की घुटने की सर्जरी: न करें, या ऊँचे ब्लॉक पर बैठें, बिल्कुल बिना दर्द के।
- टखने की चोट या बहुत अकड़े टखने: तौलिये या ब्लॉक वाला रूप अपनाएँ, या कोई और आसन चुनें, जैसे कुर्सी पर बैठना।
- वैरिकोज नसें या पैरों में खराब रक्तसंचार: कम देर रुकें।
- पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन: बाहर आ जाएँ; टखने के आगे और घुटने के पीछे की नसें लंबा दबाव पसंद नहीं करतीं।
- कॉमन योग प्रोटोकॉल की सावधानी: बवासीर (पाइल्स) से पीड़ित लोग यह आसन न करें, और घुटने के दर्द या टखने की चोट वाले इससे बचें।
ग्रंथों में
वज्रासन शास्त्रीय आसन है। घेरंड संहिता इसे अपने बत्तीस आसनों में गिनाती है और इसे एक श्लोक देती है:
जङ्घयोर्वज्रवत्कृत्वा गुदपार्श्वे पदावुभौ । वज्रासनं भवेदेतद्योगिनां सिद्धिदायकम् ॥
jaṅghayor vajravat kṛtvā guda-pārśve padāv ubhau | vajrāsanaṃ bhaved etad yogināṃ siddhi-dāyakam ||
पिंडलियों को वज्र की तरह दृढ़ करके और दोनों पैरों को गुदा के दोनों ओर रखकर: यह वज्रासन है, जो योगियों को सिद्धि देता है।
श्रीश चंद्र वसु का 1914-1915 का अंग्रेजी अनुवाद पहले शब्दों को «जाँघों को वज्र की तरह कस लें» के भाव में लेता है, और योगी को «सिद्धियों» का वचन देता है। हठयोग प्रदीपिका इस नाम का अलग उपयोग करती है: उसके लेखक के लिए वज्रासन बस वह दूसरा नाम है जो कुछ आचार्य सिद्धासन को देते हैं (1.39)। दो ग्रंथ, एक नाम, दो आसन: यह अच्छी याद दिलाता है कि हर नाम को उसके स्रोत में पढ़ना चाहिए।
क्या यह सामान्य है?
शुरू में पैर सुन्न हो सकते हैं। वजन थोड़ा आगे करें, उँगलियाँ हिलाएँ, और कम देर बैठें; अभ्यास के साथ यह ठीक होता जाता है।
जुड़े हुए आसन
वज्रासन भुजंगासन और बालासन का आरंभ-बिंदु है, अनुलोम विलोम के लिए अच्छी बैठक है, और ध्यान कैसे करें में बताए गए आसनों में से एक है। पालथी वाले आसनों के लिए देखें पद्मासन और अर्ध पद्मासन; सभी आसनों के लिए आसन अध्याय।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या खाना खाने के बाद वज्रासन में बैठना अच्छा है?
यह भारत की व्यापक परंपरा है, और भोजन के बाद यह आसन आरामदायक लगता है क्योंकि पेट दबता नहीं। पर किसी प्रकाशित परीक्षण ने केवल वज्रासन का पाचन पर असर नहीं जाँचा है, इसलिए इसे शांत बैठने का आसन मानें, उपचार नहीं।
वज्रासन में कितनी देर बैठना चाहिए?
एक-दो मिनट से शुरू करें। अगर घुटने, टखने और पैर आराम में रहें, तो धीरे-धीरे पाँच से दस मिनट तक बढ़ाएँ। पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन का अर्थ है कि अब बाहर आने का समय है।
वज्रासन के फायदे क्या हैं?
आयुष मंत्रालय की कॉमन योग प्रोटोकॉल पुस्तिका इसे ध्यान का आसन बताती है और पाचन तथा जाँघ-पिंडलियों की मांसपेशियों के लिए अच्छा कहती है। ठोस बात यह है कि इसमें कूल्हों के लचीलेपन की जरूरत नहीं, इसलिए जो पालथी नहीं मार पाते, वे भी सीधी रीढ़ से बैठ सकते हैं।
इसे वज्रासन क्यों कहते हैं?
वज्र देवराज इंद्र का अस्त्र है, और उसी से हर कठोर, अटूट चीज को भी वज्र कहते हैं, इसीलिए इसका अर्थ हीरा भी है। श्लोक कहता है कि पिंडलियों को वज्र की तरह दृढ़ करें।
धीरे-धीरे और अपनी सीमा के भीतर अभ्यास करें। योग किसी योग्य शिक्षक से सीखना सबसे अच्छा है; यह पृष्ठ उनकी जगह नहीं लेता।
स्रोत
- The Gheranda Samhita, translated by Srisa Chandra Vasu (Sacred Books of the Hindus, vol. XV, Panini Office, 1914-1915), Internet Archive 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया
- घेरंड संहिता, संस्कृत पाठ, अध्याय 2 (GRETIL, गॉटिंगेन विश्वविद्यालय) 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया
- स्वात्माराम, हठयोगप्रदीपिका, संस्कृत पाठ (GRETIL, गॉटिंगेन विश्वविद्यालय) 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया
- Common Yoga Protocol, 4th revised edition (May 2019), Morarji Desai National Institute of Yoga, Ministry of AYUSH, Government of India 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया